Sunday, May 15, 2016

भारतीय इतिहास : पुनरावलोकन - 2

ईसवीं वर्ष
14-15 : शक (हिन्द पार्थियन) शासक गोंडोफर्नीज का शासन, ईसाई धर्म प्रचार हेतु रोमन संत सेंट टामस का भारत आगमन ।
15 : कुषाणों (यू-ची का तोचारियन) का भारत में प्रवेश ।
64 : उत्तर-पश्चिमी भारत में शक विम कडफिसस का राज्य ।
78 : कुषाण वंश के महानतम शासक कनिष्क का राज्यारोहण, उसके द्वारा शक संवत् का प्रारम्भ ।
78-101 : कनिष्क का शासनकल, चौथी बौद्ध संगीति का (कश्मीर में) आयोजन ।
100 : अश्वघोष द्वारा सौन्दरानन्द तथा बुद्धचरित एवं कुमारलाट द्वारा कल्पमंदीतिका की रचना ।
109-132 : महानतम सातवाहन शासक गौतमीपुत्र शातकर्णी द्वारा राज्य विस्तार ।
150 : बघेलखंड, वाराणसी, विदिशा तथा आगे चलकर मथुरा तक के क्षेत्र में भारशिव नागाओं की विभिन्न शाखाओं का राज्य ।
200-250 : सातवाहनों का पतन, महाराष्ट्र में आभीर, उत्तरी कनारा तथा मैसूर जिलों में कुंतल और चटु, आंध्र मे इक्ष्वाकु तथा विदर्भ में वाकाटकों की सत्ता स्थापित ।
225 : विंध्यशक्ति द्वारा वाकाटक शासन की स्थापना, अगले 272 वर्षों तक इस वंश का शासन ।
250 : नासिक में आभिरो द्वारा त्रैकुटकर वंश की स्थापना, अगले 250 वर्षों तक इस वंश का शासन ।
320-335 : चन्द्रगुप्त प्रथम ने गुप्त वंश को स्थापित किया ।
       महमूद गजनवी के 17 आक्रमण
1000 : काबुल, 1001-1002 : पेशावर वैहिंद, 1004-1005 : भाटिया, 1006 : मुल्तान, 1007-1008 : आनंदपाल की हार, 1009 : नारायणपुरा, 1010 : मुल्तान, 1010-1012 : थानेश्वर, 1013-14 : हिन्दूशाही राजधानी उद् भाण्डपुर, 1015-1016 : लोहकोट, कश्मीर, 1018-1019 : मथुरा, कन्नौज शाखा, 1020-1021 : त्रिलोचनपाल तथा प्रतिहार राजा पराजित, 1021-1022 : लोहकोट कश्मीर, 1022-1023 : ग्वालियर, कालिंजर, 1025-1026 : सोमनाथ, 1027 : गुजरात-सिंध ।
325 : कृष्णा नदी के दक्षिण में पल्लव वंशी राज्य की स्थापना ।
335-376 : समुद्र गुप्त का शासनकल ।
330-375 : सम्पूर्ण उत्तर भारत में समुद्रगुप्त का शासन । पूर्व में असम, पश्चिम में काबुल, उत्तर में नेपाल तथा दक्षिण में पल्लवों तक, केवल उज्जैन स्वतंत्र (शक वंश के अधीन) ।
350 : मयूरशर्मन द्वारा कदम्ब वंश की स्थापना जो अगले 200 वर्षों तक विधमान रहा ।
375-413 : चन्द्रगुप्त द्वितीय विक्रमादित्य द्वारा उज्जैन, मालवा तथा गुजरात पर विजय, राजघनी पाटलिपुत्र से अयोध्या और तत्पश्चात कौशाम्बी स्थानान्तरित, चीनी यात्री फहयान का भारत आगमन ।
415-454 : कुमारगुप्त प्रथम का शासनकाल, नालंदा में बौद्ध विहार तथा विश्वविध्यालय की स्थापना, हूणों के आक्रमण का खतरा ।
455-467 : स्कन्दगुप्त का शासनकाल, हूणों का भारत पर प्रथम आक्रमण तथा उनकी पराजय ।
477-496 : बुद्धगुप्त-गुप्तवंश का अंतिम सम्राट, गुप्तवंश का विघटन प्रारम्भ ।
500-502 : हूणों के प्रथम शासक तोरमाण द्वारा भारत में राज्य स्थापना तथा मध्यवर्ती भाग (मालवा में एरण) तक उसका विस्तार ।
502-528 : तोरमाण का उत्तराधिकारी मिहिरकुल भारत में गुप्त शासक भानुगुप्त द्वारा पराजय, एरण पर गुप्तवंश का पुनः अधिकार (510) ।
533 : मंदसौर के यशोधर्मन की मिहिरकुल पर विजय ।
540 : परवर्ती गुप्त तथा गुप्त वंश की मुख्य शाखा का अंत ।
606-647 : हर्ष (पुष्यभूति या कान्यकुब्ज वंश) का शासनकाल । चीनी बौद्ध यात्री ह्वेनसांग का भारत आगमन (630-44), बाणभट्ट ने हर्षचरित की रचना की ।
647 : तिब्बत से कन्नौज आते हुए हेनसांग पर किसी स्थानीय सामंत द्वारा हमला ।
700 : कन्नौज में यशोवर्मन (मौखरी वंश) सिंहासनारूढ़, संस्कृत नाट्यकार भवभूति तथा प्राकृत कवि वाक्पतिराज को उसके राजदरबार में संरक्षण ।
600-1200 : मौखरी वंश के शासक यशोवर्मन की मृत्यु (752), उत्तर, मध्य, पश्चिम तथा दक्षिण भारत में अनेक सामंतों द्वारा स्वतन्त्रता की घोषणा, अनेक छोटे-बड़े राज्यों का उदय, बंगाल में गौड़, खंग, वर्मन, पाल तथा सेन वंश, उज्जैन में गुर्जर-प्रतिहार, कन्नौज में प्रतिहार, उड़ीसा में भौम, भंज, सोम तथा पूर्वी गंग वंश, असम में भास्कर वर्मा, गुजरात में चालुक्य, धारा में परमार, नर्मदा-त्रिपुरी तथा उत्तर प्रदेश में कलचुरी, राजस्थान में चाहमान (चौहान), बुंदेलखंड में चंदेल, कन्नौज में गहड़वाल, कश्मीर में कार्कोट, उत्पल तथा लोहार, अफगानिस्तान-पंजाब में हिन्दूशाही वंश ।
      पश्चिमी भारत
490-766 : सौराष्ट्र के बल्लभी क्षेत्र में मैत्रक (संभवतः विदेशी मूल) आक्रामकों का शासन ।
550-861 : मध्य राजपूताना में मध्य एशिया में आये हुए गुर्जर ख़ानाबदोश दलों का शासन स्थापित  ।
712 : मुहम्मद बिन कासिम के नेतृत्व में भारत पर प्रथम अरब आक्रमण, मैत्रक राज्य का पतन ।
740-1036 : उत्तर भारत में गुर्जर-प्रतिहारों का अधिपत्य, अरबों का प्रतिरोध ।
746-974 : छाप या छापौटकट्ट, गुर्जर कबीले द्वारा 746 के आस-पास अंहिलपुर (आनंदपुर) की स्थापना, जो 15वीं सदी तक पश्चिम भारत का प्रमुख नगर रहा ।  
831-1310 : चंदेलों द्वारा बुंदेलखंड में स्वतंत्र राज्य की स्थापना, अनेक विष्णु मंदिरों का निर्माण (खजूराहों के मंदिर भी) ।
840-890 : सतलज से नर्मदा नदी तक मिहिरभोज या भोज का शासन ।
950-1200 : इंदौर के पास धारा में परमारों का राज्य, जिनमें मुंज (974-994) तथा भोज प्रसिद्ध राजा हुए, भोज ज्योतिष,काव्यशास्त्र, वास्तुकला तथा संस्कृति का विद्वान था ।
974-1240 : चालूक्यों का अनहिलपुर, सौराष्ट्र तथा आबू क्षेत्र में प्रभुत्व, चालुक्य शासक मूलराज का शासन काल (974-995) ।
दक्षिणी भारत
50 ई.पू.-250 ई. : ढक्कन में सातवाहन वंश ।
100-200 : संगम युग, करिकाल का शासन (त्रिचरापल्ली के निकट कावेरी नदी पर बांध का निर्माण )
300-888 : कांची में पल्लवों का शासनकाल ।
500-757 : पश्चिमी तथा मध्य ढक्कन में वातापी का प्रथम चालुक्य वंश ।
630-970 : पूर्वी ढक्कन में वर्गों के पूर्वी चालूक्यों का शासन काल ।
757-973 : मान्यखेत में राष्ट्रकूटों का शासनकाल ।
985-1014 : चोल शासक राजराज का शासनकाल, भूमि-सर्वेक्षण का प्रारम्भ (1000 ई.)
1014-1044 : चोल राजा राजेन्द्र का शासनकाल, श्रीलंका की विजय (1018), बंगाल पर आक्रमण (1021) ।
1044-52 : राजेन्द्र के उत्तराधिकारी राजाधिराज प्रथम का शासनकाल ।
1052-64 : राजेन्द्र II का शासनकाल ।
1064-70 : वीर राजेन्द्र चोल का शासनकाल ।
1070-1120 : कुलोतुंग प्रथम का शासनकाल, आंध्र का चोल राज्य में विलय (1076) ।
1120-1267 : परवर्ती चोल शासको का काल ।
973-1189 : कल्याणी का द्वितीय चालुक्य वंश ।
636-637 : खलीफा उमर के समय में अरबों का भारत पर पहला अभिलिखित हमला ।
643 : चीनी यात्री हेनसांग की चीनी वापसी ।
647 : हर्षवर्धन की मृत्यु, हेनसांग पर हमला ।
674 : विक्रमादित्य प्रथम चालुक्य और परमेश्वर वर्मा प्रथम पल्लव शासक बने ।
675-685 : तीसरे चीन यात्री इत्सिंग का नालन्दा आवास ।
700-900 : दक्षिण भारत में आलवारों (वैष्ण) का भक्ति आंदोलन, भक्ति संग्रह प्रबंधम् की रचना ।
712 : मुहम्मद बिन कासिम का सिंध पर आक्रमण, देवलगढ़ विजय, निरुन की लड़ाई में हिन्दू राजा दाहिर की मृत्यु, कासिम की ब्राह्मणाबाद पर विजय ।
730 : कन्नौज में मौखरी शासक यशोवर्मन सिंहासनरूढ़ ।
753-774 : खलीफा मंसूर के काल में ब्रह्मगुप्त के ब्रह्म सिद्धांत तथा खण्डनखाड्य का अल्फजारी द्वारा अरबी में अनुवाद ।
786-808 :ईरानी शासक खलीफा  हारून-अल-रशीद का शासनकाल, बरमस्क (एक मंत्री) द्वारा भारत के अनेक वैधो, ज्योतिषियों, रसायनशास्त्रियों, विचारकों को बगदाद बुलाकर उनसे इन विषयों के अनेक ग्रन्थों का अरबी में अनुवाद करवाया गया ।
824-924 : वैष्णव भक्ति काल ।
986-87 : खुरासनी शासक अलप्तगीन के गुलाम सुबुक्तगीन का काबुल-कंधार में हिंदुशाही शासक जयपाल पर प्रथम आक्रमण, जयपाल पराजित ।
997-998 : सुबुक्तगीन की मृत्यु, महमूद गजनवी खुरासन की गद्दी पर बैठा ।
999 : बगदाद के खलीफा द्वारा महमूद गजनवी को स्वतंत्र शासक के रूप में मान्यता ।
1000 : महमूद गजनवी का भारत पर (काबुल में) प्रथम आक्रमण, स्थानीय जनता पर लूट तथा धर्म परिवर्तन ।
1002 : महमूद गजनवी का तीसरा आक्रमण, आनंदपाल से युद्ध तथा उसकी पराजय ।
1010 : आनन्दपाल अपमानजनक शर्तों पर महमूद गजनवी का सामंत बना ।
1011-1012 : महमूद का थानेश्वर पर आक्रमण, उत्तर-पश्चिम भारत में हिंदुशाही को छोटे-बड़े सभी राज्य ध्वस्त ।
1013 : आनन्दपाल की मृत्यु, पुत्र त्रिलोचनपाल उत्तराधिकारी बना ।
1014 : तोषी की लड़ाई मे त्रिलोचनपाल परास्त, झेलम तक का क्षेत्र गजनवी के राज्य में सम्मिलित ।
1017 : शंकराचार्य के मायावाद का खण्डन कर विशिष्टाद्वैतवाद मत की स्थापना करने वाले वैष्णव आचार्य रामानुज का जन्म ।
1018-1019 : गजनवी का गंगा-यमुना दोआब क्षेत्र पर कब्जा ।
1025-1026 : गजनवी द्वारा सोमनाथ मंदिर (गुजरात) की लूट ।
1026 : अंतिम हिंदुशाही शासक भीमपाल की मृत्यु, काबुल-कंधार के हिंदुशाही वंश का अंत ।
1027 : जाटों को कुचलने के लिए महमूद का भारत (गुजरात-सिंध) पर 17वां व अंतिम आक्रमण ।
1030 : महमूद गजनवी की मृत्यु, मसूद गजनी का सुल्तान, किताब-उल-हिन्द के लेखक अल-बरूनी का भारत आगमन ।

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